भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 3/52 / 170
52वे तथ्य, जिनका न्यायालय न्यायिक अवलोकन करेगा
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 498–499स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्द(1) न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों का न्यायिक अवलोकन करेगा, अर्थात्:—
(क) भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियां, जिनके अंतर्गत वे विधियां सम्मिलित हैं जिनका राज्यक्षेत्रातीत प्रवर्तन है ;
(ख) भारत द्वारा किसी देश या देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय संधि, करार या अभिसमय या अंतर्राष्ट्रीय संगमों या अन्य निकायों में भारत द्वारा किए गए विनिश्चय ;
(ग) भारत की संविधान सभा, भारत की संसद् और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का अनुक्रम ;
(घ) सभी न्यायालयों और अधिकरणों की मुद्राएं ;
(ङ) नावधिकरण और समुद्रीय अधिकारिता वाले न्यायालयों की, नोटेरी पब्लिक की मुद्राएं और वे सब मुद्राएं, जिनका कोई व्यक्ति संविधान या संसद् या राज्य विधान-मंडलों के किसी अधिनियम या भारत में विधि का बल रखने वाले विनियम द्वारा उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है ;
(च) किसी राज्य में किसी लोक पद को तत्समय भरने वाले व्यक्तियों का पदारोहण, उनके नाम, उपाधियां, कृत्य और हस्ताक्षर, यदि ऐसे पद पर उनकी नियुक्ति का तथ्य किसी राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो ;
(छ) भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त प्रत्येक देश या संप्रभु का अस्तित्व, उपाधि और राष्ट्रीय ध्वज ;
(ज) समय का अन्तराल, विश्व का भौगोलिक विभाजन और राजपत्र में अधिसूचित लोक उत्सव, उपवास और अवकाश दिन ;
(झ) भारत का राज्यक्षेत्र ;
(ञ) भारत सरकार और किसी अन्य देश या व्यक्तियों के निकाय के बीच संघर्ष का प्रारम्भ, चालू रहना और पर्यवसान ;
(ट) न्यायालय के सदस्यों और अधिकारियों के तथा उनके उप-पदियों और अधीनस्थ अधिकारियों और सहायकों के और अपनी आदेशिका का निष्पादन करते हुए कार्य करने वाले सब अधिकारियों के भी, तथा सभी अधिवक्ताओं और उनके समक्ष उपस्थित होने या कार्य करने के लिए किसी विधि द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्तियों के नाम ;
(ठ) भूमि पर या समुद्र में मार्ग का नियम ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मामलों में, और लोक इतिहास, साहित्य, विज्ञान या कला के सब विषयों में भी, न्यायालय समुचित निर्देश पुस्तकों । या दस्तावेजों की सहायता ले सकेगा और यदि न्यायालय से किसी तथ्य का न्यायिक अवलोकन करने की किसी व्यक्ति द्वारा अपेक्षा की जाती है, तो यदि और जब तक वह व्यक्ति कोई ऐसी पुस्तक या दस्तावेज प्रस्तुत न कर दे, जिसे ऐसा न्यायालय अपने को ऐसा करने को समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझता है, न्यायालय ऐसा करने से इंकार कर सकेगा ।
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