दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 6/94 / 534
84कुर्की के बारे में दावे और आपत्तियां
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 23स्रोत
(1) यदि धारा 83 के अधीन कुर्क की गई किसी संपत्ति के बारे में उस कुर्की की तारीख से छह मास के भीतर कोई व्यक्ति, जो उद्घोषित व्यक्ति से भिन्न है, इस आधार पर दावा या उसके कुर्क किए जाने पर आपत्ति करता है कि दावेदार या आपत्तिकर्ता का उस संपत्ति में कोई हित है और ऐसा हित धारा 83 के अधीन कुर्क नहीं किया जा सकता तो उस दावे या आपत्ति की जांच की जाएगी, और उसे पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर किया जा सकता है :
परंतु इस उपधारा द्वारा अनुज्ञात अवधि के अंदर किए गए किसी दावे या आपत्ति को दावेदार या आपत्तिकर्ता की मृत्यु हो जाने की दशा में उसके विधिक प्रतिनिधि द्वारा चालू रखा जा सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन दावे या आपत्तियां उस न्यायालय में, जिसके द्वारा कुर्की का आदेश जारी किया गया है, या यदि दावा या आपत्ति ऐसी संपत्ति के बारे में है जो धारा 83 की उपधारा (2) के अधीन पृष्ठांकित आदेश के अधीन कुर्क की गई है तो, उस जिले के, जिसमें कुर्की की जाती है मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में की जा सकती है ।
(3) प्रत्येक ऐसे दावे या आपत्ति की जांच उस न्यायालय द्वारा की जाएगी जिसमें वह किया गया या की गई है :
परंतु यदि वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में किया गया या की गई है तो वह उसे निपटारे के लिए अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट को दे सकता है ।
(4) कोई व्यक्ति, जिसके दावे या आपत्ति को उपधारा (1) के अधीन आदेश द्वारा पूर्णतः या भागतः नामंजूर कर दिया गया है, ऐसे आदेश की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर, उस अधिकार को सिद्ध करने के लिए, जिसका दावा वह विवादग्रस्त संपत्ति के बारे में करता है, वाद संस्थित कर सकता है ; किंतु वह आदेश ऐसे वाद के, यदि कोई हो, परिणाम के अधीन रहते हुए निश्चायक होगा ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।