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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 10/202 / 570

181शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 34–35स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति से, जो ऐसे शपथ [दिलाने या प्रतिज्ञान] देने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत हो, किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए शपथ [या प्रतिज्ञान] द्वारा वैध रूप से आबद्ध होते हुए ऐसे लोक सेवक या यथापूर्वोक्त अन्य व्यक्ति से उस विषय के संबंध में कोई ऐसा कथन करेगा, जो मिथ्या है, और जिसके मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है, या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1873 के अधिनियम सं० 10 की धारा 15 द्वारा अंतःस्थापित ।
  2. 1873 के अधिनियम सं० 10 की धारा 15 द्वारा अंतःस्थापित ।

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