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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 10/196 / 570

175[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को [दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने का लोप

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 33स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी [दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] को पेश करने या परिदत्त करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार पेश करने या परिदत्त करने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, अथवा, यदि वह [दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] किसी न्यायालय में पेश या परिदत्त की जानी हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

क, जो एक [एक जिला न्यायालय] के समक्ष दस्तावेज पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है, उसको पेश करने का साशय लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2000 के अधिनियम सं० 21 की धारा 91 और पहली अनुसूची द्वारा “दस्तावेज” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “जिला न्यायालय” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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