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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 23/570 / 570

511आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के प्रयत्न करने के लिए दण्ड

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 99स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई इस संहिता द्वारा [आजीवन कारावास] से या कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किए जाने का प्रयत्न करेगा, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, जहां कि ऐसे प्रयत्न के दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता द्वारा नहीं किया गया है, वहां वह [उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से उस अवधि के लिए, जो, यथास्थिति, आजीवन कारावास से आधे तक की या उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी] या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।

दृष्टांत

(क) क, एक सन्दूक तोड़कर खोलता है और उसमें से कुछ आभूषण चुराने का प्रयत्न करता है । सन्दूक इस प्रकार खोलने के पश्चात् उसे ज्ञात होता है कि उसमें कोई आभूषण नहीं है । उसने चोरी करने की दिशा में कार्य किया है, और इसलिए, वह इस धारा के अधीन दोषी है।

(ख) क, य की जेब में हाथ डालकर य की जेब से चुराने का प्रयत्न करता है । य की जेब में कुछ न होने के परिणामस्वरूप क अपने प्रयत्न में असफल रहता है । क इस धारा के अधीन दोषी है ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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