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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 4/91 / 570

87सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 13स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो कि उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना संभाव्य है, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है जो उस बात से अठारह वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को, जिसने वह अपहानि सहन करने की चाहे अभिव्यक्त, चाहे विवक्षित सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित होना कर्ता द्वारा आशयित हो अथवा जिसके बारे में कर्ता को ज्ञात हो कि वह उपर्युक्त जैसे किसी व्यक्ति को, जिसने उस अपहानि की जोखिम उठाने की सम्मति दे दी है, उस बात द्वारा कारित होनी संभाव्य है ।

दृष्टांत

क और य आमोदार्थ आपस में पटेबाजी करने को सहमत होते हैं । इस सहमति में किसी अपहानि को, जो ऐसी पटेबाजी में खेल के नियम के विरुद्ध न होते हुए कारित हो, उठाने की हर एक को सम्मति विवक्षित है, और यदि क यथानियम पटेबाजी करते हुए य को उपहति कारित कर देता है, तो क कोई अपराध नहीं करता है ।

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