भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 2/11 / 358
11एकांत परिरोध
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 21–22स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजब कभी कोई व्यक्ति, ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है जिसके लिए इस संहिता के अधीन न्यायालय को उसे कठिन कारावास से दंडादिष्ट करने की शक्ति है, तो न्यायालय अपने दंडादेश द्वारा आदेश दे सकेगा कि अपराधी को उस कारावास के, जिसके लिए वह दंडादिष्ट किया गया है, किसी भाग या भागों के लिए, जो कुल मिलाकर तीन मास से अधिक नहीं होंगे, निम्नलिखित मापमान के अनुसार एकांत परिरोध में रखा जाएगा, अर्थात् :—
(क) यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक नहीं है, तो एक मास से अनधिक समय :;
(ख) यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक है और एक वर्ष से अधिक नहीं है, तो दो मास से अनधिक समय ;
(ग) यदि कारावास की अवधि एक वर्ष से अधिक है, तो तीन मास से अनधिक समय ।
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