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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 2/8 / 358

8जुर्माने की रकम, जुर्माना, आदि देने में व्यतिक्रम होने पर दायित्व

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 19–20स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

(1) जहां वह राशि अभिव्यक्त नहीं की गई है कि कितना जुर्माना । हो सकेगा, वहां जुर्माने की रकम का जिसके लिए अपराधी दायी है, वह असीमित है, किन्तु अत्यधिक नहीं होगी ।

(2) किसी अपराध के प्रत्येक मामले में,—

(क) जो कारावास के साथ जुर्माने से भी दण्डनीय है, जिसमें अपराधी कारावास सहित या रहित, जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है :

(ख) जो कारावास या जुर्माने या केवल जुर्माने से दण्डनीय है, जिसमें अपराधी जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है,

वह न्यायालय, जो ऐसे अपराधी को दण्डादिष्ट करेगा, सक्षम होगा कि दण्डादेश द्वारा यह निदेश दे कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में, अपराधी किसी अमुक अवधि के लिए कारावास भोगेगा, जो कारावास उस अन्य कारावास के अतिरिक्त होगा जिसके लिए वह दण्डादिष्ट हुआ है या जिसके लिए वह किसी दण्डादेश के लघुकरण के अधीन दायी हो सकेगा ।

(3) यदि अपराध कारावास के साथ जुर्माने से भी दण्डनीय है, तो वह अवधि, जिसके लिए जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में न्यायालय अपराधी को कारावासित करने का निदेश दे, कारावास की उस अवधि की एक चौथाई से अधिक नहीं होगी, जो उस अपराध के लिए अधिकतम नियत है ।

(4) वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने के लिए या सामुदायिक सेवा में व्यतिक्रम के लिए अधिरोपित करे, ऐसा किसी भांति का हो सकेगा, जिससे अपराधी को उस अपराध के लिए दण्डादिष्ट किया जा सकता था ।

(5) यदि अपराध जुर्माने से या सामुदायिक सेवा से दण्डनीय है, तो वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में या सामुदायिक सेवा में व्यतिक्रम होने की दशा में अधिरोपित करे, सादा होगा और वह अवधि, जिसके लिए जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में या सामुदायिक सेवा में व्यतिक्रम होने की दशा में न्यायालय अपराधी को कारावासित करने का निदेश दे, निम्नलिखित अवधि होगी,—

(क) जब जुर्माने की रकम पांच हजार रुपए से अधिक की न हो, तब दो मास से अनधिक कोई अवधि ;

(ख) जब जुर्माने की रकम दस हजार रुपए से अधिक की न हो, तब चार मास से अनधिक कोई अवधि ; और

(ग) किसी अन्य दशा में, एक वर्ष से अनधिक कोई अवधि ।

(6)(क) जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में अधिरोपित कारावास तब समाप्त हो जाएगा, जब वह जुर्माना या तो चुका दिया जाए या विधि की प्रक्रिया द्वारा उद्गृहीत कर लिया जाए ;

(ख) यदि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में नियत की गई कारावास की अवधि का अवसान होने से पूर्व जुर्माने का ऐसा अनुपात चुका दिया जाए या उद्गृहीत कर लिया जाए कि देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास की अवधि जो भोगी जा चुकी है, वह जुर्माने के तब तक न चुकाए गए भाग के आनुपातिक से कम न हो तो कारावास समाप्त हो जाएगा ।

दृष्टांत

क एक हजार रुपए के जुर्माने और उसके देने में व्यतिक्रम होने की दशा में चार मास के कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है । यहां, यदि कारावास के एक मास के अवसान से पूर्व जुर्माने के सात सौ पचास रुपए चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाएं तो प्रथम मास का अवसान होते ही क उन्मुक्त कर दिया जाएगा । यदि सात सौ पचास रुपए प्रथम मास के अवसान पर या किसी भी पश्चात्वर्ती समय पर, जबकि क कारावास में है, चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाएं, तो क तुरन्त उन्मुक्त कर दिया जाएगा । यदि कारावास के दो मास के अवसान से पूर्व जुर्माने के पांच सौ रुपए चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाएं, तो क दो मास के पूरे होते ही उन्मुक्त कर दिया जाएगा । यदि पांच सौ रुपए उन दो मास के अवसान पर या किसी भी पश्चात्वर्ती समय पर, जब कि क कारावास में है, चुका दिए जाएं या उद्गृहीत कर लिए जाएं, तो क तुरन्त उन्मुक्त कर दिया जाएगा ।

(7) जुर्माना या उसका कोई भाग, जो चुकाया न गया हो, दण्डादेश दिए जाने के पश्चात् छह वर्ष के भीतर किसी भी समय, और यदि अपराधी दण्डादेश के अधीन छह वर्ष से अधिक के कारावास से दण्डनीय है तो उस कालावधि के अवसान से पूर्व किसी भी समय, उद्गृहीत किया जा सकेगा ; और अपराधी की मृत्यु होना, किसी भी सम्पत्ति को इस दायित्व से उन्मुक्त नहीं करती, जो उसकी मृत्यु के पश्चात् उसके ऋणों के लिए वैध रूप से दायी है ।

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