भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 2/9 / 358
9कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 21स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जहां कोई बात, जो अपराध है, ऐसे भागों से मिलकर बनी है, जिनमें का कोई भाग स्वयं अपराध है, वहां अपराधी अपने ऐसे अपराधों में से एक से अधिक के दण्ड से तब तक दण्डित नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित न हो ।
(2) जहां—
(क) कोई बात, अपराधों को परिभाषित या दण्डित करने वाली किसी तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की दो या अधिक पृथक् परिभाषाओं में आने वाला अपराध है; या
(ख) कई कार्य, जिनमें से स्वयं एक से या स्वयं एकाधिक से अपराध गठित होता है, मिलकर भिन्न अपराध गठित करते हैं,
वहां अपराधी को उससे गुरुतर दण्ड से दण्डित नहीं किया जाएगा, जो ऐसे अपराधों में से किसी भी एक के लिए वह न्यायालय, जो उसका विचारण करता है, उसे दे सकता है ।
दृष्टांत
(क) क, य पर लाठी से पचास प्रहार करता है । यहां, यह हो सकता है कि क ने सम्पूर्ण मारपीट द्वारा और उन प्रहारों में से प्रत्येक प्रहार द्वारा भी, जिनसे वह सम्पूर्ण मारपीट गठित होता है, य की स्वेच्छया उपहति कारित करने का अपराध किया है । यदि क प्रत्येक प्रहार के लिए दण्डनीय होता तो वह प्रत्येक प्रहार के लिए एक वर्ष के हिसाब से पचास वर्ष के लिए कारावासित किया जा सकता था । किन्तु वह सम्पूर्ण मारपीट के लिए केवल एक ही दण्ड से दण्डनीय है ।
(ख) किन्तु, यदि उस समय जब क, य को पीट रहा है, म हस्तक्षेप करता है और क, म पर साशय प्रहार करता है, तो यहां म पर किया गया प्रहार उस कार्य का भाग नहीं है, जिसके द्वारा क, य को स्वेच्छया उपहति कारित करता है, इसलिए क, य को स्वेच्छया कारित की गई उपहति के लिए एक दण्ड से और म पर किए गए प्रहार के लिए दूसरे दण्ड से दण्डनीय है ।
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