भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 11/197 / 358
197राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, दृढ़कथन
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 88स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या इलैक्ट्रानिक संसूचना के माध्यम से या अन्यथा,—
(क) ऐसा कोई लांछन लगाता है या प्रकाशित करता है कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और अखंडता की मर्यादा नहीं बनाए रख सकते ; या
(ख) यह दृढ़कथन करता है, परामर्श देता है, सलाह देता है, प्रचार करता है या प्रकाशित करता है कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार न दिए जाएं या उन्हें उनसे वंचित किया जाए ; या
(ग) किसी वर्ग के व्यक्तियों की बाध्यता के संबंध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, कोई दृढ़कथन करता है, परामर्श देता है, अभिवाक् करता है या अपील करता है या प्रकाशित करता है, और ऐसे दृढ़कथन, परामर्श, अभिवाक् या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असौहार्द, या शत्रुता या घृणा या वैमनस्य की भावनाएं उत्पन्न होती हैं या उत्पन्न होनी संभाव्य हैं ; या
(घ) भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली मिथ्या या भ्रामक जानकारी देता है या प्रकाशित करता है,
वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध, किसी उपासना स्थल में या धार्मिक उपासना या धार्मिक कर्म करने में लगे हुए किसी जमाव में करता है, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
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