भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 17/227 / 531
227आदेशिका का जारी किया जाना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 256–257स्रोत
(1) यदि किसी अपराध का संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की राय में कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हैं और—
(क) मामला, समन-मामला प्रतीत होता है तो वह अभियुक्त की उपस्थिति के लिए उसे समन जारी करेगा ; या
(ख) मामला वारंट-मामला प्रतीत होता है तो वह अपने या (यदि उसकी अपनी अधिकारिता नहीं है तो) अधिकारिता वाले किसी अन्य मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त के निश्चित समय पर लाए जाने या उपस्थित होने के लिए वारंट, या यदि ठीक समझता है समन, जारी कर सकता है ।
परन्तु समन या वारंट, इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से भी जारी किए जा सकेंगे ।
(2) अभियुक्त के विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन तब तक कोई समन या वारंट जारी नहीं किया जाएगा जब तक अभियोजन के साक्षियों की सूची फाइल नहीं कर दी जाती है ।
(3) लिखित परिवाद पर संस्थित कार्यवाही में उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए प्रत्येक समन या वारंट के साथ उस परिवाद की एक प्रतिलिपि होगी ।
(4) जब तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कोई आदेशिका फीस या अन्य फीस संदेय है तब कोई आदेशिका तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक फीस नहीं दे दी जाती है और यदि ऐसी फीस उचित समय के भीतर नहीं दी जाती है तो मजिस्ट्रेट परिवाद को खारिज कर सकता है ।
(5) इस धारा की कोई बात धारा 90 के उपबंधों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
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