नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 17/231 / 531

231सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय अन्य मामलों में अभियुक्त को कथनों और दस्तावेजों की प्रतिलिपियां देना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 258–259स्रोत

जहां पुलिस रिपोर्ट से भिन्न आधार पर संस्थित किसी मामले में, धारा 227 के अधीन आदेशिका जारी करने वाले मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, वहां मजिस्ट्रेट निम्नलिखित में से प्रत्येक की एक प्रतिलिपि अभियुक्त को तत्काल निःशुल्क देगा :—

(i) उन सभी व्यक्तियों के, जिनकी मजिस्ट्रेट द्वारा परीक्षा की जा चुकी है, धारा 223 या धारा 225 के अधीन लेखबद्ध किए गए कथन ;

(ii) धारा 180 या धारा 183 के अधीन लेखबद्ध किए गए कथन, और संस्वीकृतियां, यदि कोई हों ;

(iii) मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत की गई कोई दस्तावेजें, जिन पर निर्भर रहने का अभियोजन का विचार है :

परंतु यदि मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि ऐसी कोई दस्तावेज विशालकाय है, तो वह अभियुक्त को उसकी प्रतिलिपि देने के बजाय यह निदेश देगा कि उसे स्वयं या अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में उसका निरीक्षण ही करने दिया जाएगा :

परन्तु यह भी कि इलैक्ट्रानिक प्ररूप में उन दस्तावेजों को प्रदाय करने के लिए विचार किया जाएगा जो सम्यक् रूप से प्रस्तुत किए गए हैं ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।