भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 17/229 / 531
229छोटे अपराधों के मामले में विशेष समन
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 257–258स्रोत
(1) यदि किसी छोटे अपराध का संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की राय में, मामले को धारा 283 या धारा 284 के अधीन संक्षेपतः निपटाया जा सकता है तो वह मजिस्ट्रेट, उस दशा के सिवाय, जहां उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, उसकी प्रतिकूल राय है, अभियुक्त से यह अपेक्षा करते हुए उसके लिए समन जारी करेगा कि वह विनिर्दिष्ट तारीख को मजिस्ट्रेट के समक्ष या तो स्वयं या अधिवक्ता द्वारा उपस्थित हो या यदि वह मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हुए बिना आरोप का दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है तो लिखित रूप में उक्त अभिवाक् और समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम डाक या संदेशवाहक द्वारा विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व भेज दे या यदि वह अधिवक्ता द्वारा उपस्थित होना चाहता है और ऐसे अधिवक्ता द्वारा उस आरोप के दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है तो अधिवक्ता को अपनी ओर से आरोप के दोषी होने का अभिवचन करने के लिए लिखकर प्राधिकृत करे और ऐसे अधिवक्ता की माध्यम से जुर्माने का संदाय करे :
परंतु ऐसे समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम पांच हजार रुपए से अधिक न होगी ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए “छोटे अपराध” से कोई ऐसा अपराध अभिप्रेत है, जो केवल पांच हजार रुपए से अनधिक जुर्माने से दंडनीय है किंतु इसके अंतर्गत कोई ऐसा अपराध नहीं है जो मोटरयान अधिनियम, 1988 के अधीन या किसी अन्य ऐसी विधि के अधीन, जिसमें दोषी होने के अभिवाक् पर अभियुक्त की अनुपस्थिति में उसको दोषसिद्ध करने के लिए उपबंध है, इस प्रकार दंडनीय है ।
(3) राज्य सरकार, किसी मजिस्ट्रेट को उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे अपराध के संबंध में करने के लिए, जो धारा 359 के अधीन शमनीय है, या जो कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से अधिक नहीं है या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय है अधिसूचना द्वारा विशेष रूप से वहां सशक्त कर सकती है, जहां मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान रखते हुए मजिस्ट्रेट की राय है कि केवल जुर्माना अधिरोपित करने से न्याय के उद्देश्य पूरे हो जाएंगे ।
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