भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 17/232 / 531
232जब अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है तब मामला उसे सुपुर्द करना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 259स्रोत
जब पुलिस रिपोर्ट पर या अन्यथा संस्थित किसी मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है और मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है तो वह—
(क) धारा 230 या धारा 231 के उपबंधों का अनुपालन करने के पश्चात् मामला सेशन न्यायालय को सुपुर्द करेगा और जमानत से संबंधित इस संहिता के उपबंधों के अधीन रहते हुए अभियुक्त व्यक्ति को अभिरक्षा में तब तक के लिए प्रतिप्रेषित करेगा जब तक ऐसी सुपुर्दगी नहीं कर दी जाती है ;
(ख) जमानत से संबंधित इस संहिता के उपबंधों के अधीन रहते हुए विचारण के दौरान और समाप्त होने तक अभियुक्त को अभिरक्षा में प्रतिप्रेषित करेगा ;
(ग) मामले का अभिलेख तथा दस्तावेजें और वस्तुएं, यदि कोई हों, जिन्हें साक्ष्य में प्रस्तुत किया जाना है, उस न्यायालय को भेजेगा ;
(घ) मामले के सेशन न्यायालय को सुपुर्द किए जाने की लोक अभियोजक को सूचना देगा :
परन्तु इस धारा के अधीन कार्यवाहियां संज्ञान लेने की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर पूरी की जाएंगी और ऐसी अवधि मजिस्ट्रेट द्वारा उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएं ऐसी उस अवधि तक विस्तारित की जा सकेगी जो एक सौ अस्सी दिन की अवधि से अधिक न हो :
परन्तु यह और कि जहां कोई आवेदन सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय किसी मामले में अभियुक्त या पीड़ित या ऐसे व्यक्ति द्वारा प्राधिकृत किए गए किसी व्यक्ति द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष फाइल किया गया है तो वह मामले को सुपुर्द करने के लिए सेशन न्यायालय को भेजा जाएगा ।
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