भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 17/230 / 531
230अभियुक्त को पुलिस रिपोर्ट या अन्य दस्तावेजों की प्रतिलिपि देना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 258स्रोत
किसी ऐसे मामले में जहां कार्यवाही पुलिस रिपोर्ट के आधार पर संस्थित की गई है, वहां मजिस्ट्रेट बिना किसी देरी के और किसी भी दशा में अभियुक्त को पेश करने या उसके उपसंजात होने की तारीख से, जो चौदह दिन की अवधि से अधिक नहीं हो, निम्नलिखित में से प्रत्येक की एक प्रति अभियुक्त और पीड़ित को (यदि उसका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्वारा किया गया हो) अविलंब निःशुल्क देगा :—
(i) पुलिस रिपोर्ट ;
(ii) धारा 173 के अधीन लेखबद्ध की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट ;
(iii) धारा 180 की उपधारा (3) के अधीन अभिलिखित उन सभी व्यक्तियों के कथन, जिनकी अपने साक्षियों के रूप में परीक्षा करने का अभियोजन का विचार है, उनमें से किसी ऐसे भाग को छोड़कर जिनको ऐसे छोड़ने के लिए निवेदन धारा 493 की उपधारा (7) के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया है ;
(iv) धारा 183 के अधीन लेखबद्ध की गई संस्वीकृतियां या कथन, यदि कोई हों;
(v) कोई अन्य दस्तावेज या उसका सुसंगत उद्धरण, जो धारा 193 की उपधारा (6) के अधीन पुलिस रिपोर्ट के साथ मजिस्ट्रेट को भेजी गई है :
परंतु मजिस्ट्रेट खण्ड (iii) में निर्दिष्ट कथन के किसी ऐसे भाग का परिशीलन करने और ऐसे निवेदन के लिए पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए कारणों पर विचार करने के पश्चात् यह निदेश दे सकता है कि कथन के उस भाग की या उसके ऐसे प्रभाग की, जैसा मजिस्ट्रेट ठीक समझे, एक प्रतिलिपि अभियुक्त को दी जाए :
परंतु यह और कि यदि मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि कोई दस्तावेज विशालकाय है तो वह अभियुक्त और पीड़ित (यदि उसका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्वारा किया गया है) को उसकी प्रतिलिपि देने के बजाय इलैक्ट्रानिक साधन के माध्यम से प्रति को दिया जा सकेगा या यह निदेश देगा कि उसे स्वयं या अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में उसका निरीक्षण ही करने दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि इलैक्ट्रानिक प्ररूप में उन दस्तावेजों को प्रदाय करने के लिए विचार किया जाएगा जो सम्यक् रूप से प्रस्तुत किए गए हैं ।
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