नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 18/236 / 531

236कब अपराध किए जाने की रीति कथित की जानी चाहिए

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 261–262स्रोत

जब मामला इस प्रकार का है कि धारा 234 और धारा 235 में वर्णित विशिष्टियां अभियुक्त को उस बात की, जिसका उस पर आरोप है, पर्याप्त सूचना नहीं देती तब उस रीति की, जिसमें अभिकथित अपराध किया गया, ऐसी विशिष्टियां भी, जैसी उस प्रयोजन के लिए पर्याप्त हैं, आरोप में अंतर्विष्ट होंगी ।

दृष्टांत

(क) क पर वस्तु-विशेष की विशेष समय और स्थान में चोरी करने का अभियोग है । यह आवश्यक नहीं है कि आरोप में वह रीति उपवर्णित हो जिससे चोरी की गई ।

(ख) क पर ख के साथ कथित समय पर और कथित स्थान में छल करने का अभियोग है । आरोप में वह रीति, जिससे क ने ख के साथ छल किया, उपवर्णित करनी होगी ।

(ग) क पर कथित समय पर और कथित स्थान में मिथ्या साक्ष्य देने का अभियोग है । आरोप में क द्वारा दिए गए साक्ष्य का वह भाग उपवर्णित करना होगा जिसका मिथ्या होना अभिकथित है ।

(घ) क पर लोक सेवक ख को उसके लोक कृत्यों के निर्वहन में कथित समय पर और कथित स्थान में बाधित करने का अभियोग है । आरोप में वह रीति उपवर्णित करनी होगी जिससे क ने ख को उसके कृत्यों के निर्वहन में बाधित किया ।

(ङ) क पर कथित समय पर और कथित स्थान में ख की हत्या करने का अभियोग है । यह आवश्यक नहीं है कि आरोप में वह रीति कथित हो जिससे क ने ख की हत्या की ।

(च) क पर ख को दंड से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा करने का अभियोग है । आरोपित अवज्ञा और अतिलंघित विधि का उपवर्णन आरोप में करना होगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।