भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 18/243 / 531
243एक से अधिक अपराधों के लिए विचारण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 264–266स्रोत
(1) यदि परस्पर संबद्ध ऐसे कार्यों के, जिनसे एक ही संव्यवहार बनता है, एक क्रम में एक से अधिक अपराध एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए हैं तो ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए एक ही विचारण में उस पर आरोप लगाया जा सकता है और उसका विचारण किया जा सकता है ।
(2) जब धारा 235 की उपधारा (2) में या धारा 242 की उपधारा (1) में उपबंधित रूप में, आपराधिक न्यास भंग या बेईमानी से सम्पत्ति के दुर्विनियोग के एक या अधिक अपराधों से आरोपित किसी व्यक्ति पर उस अपराध या उन अपराधों के किए जाने को सुकर बनाने या छिपाने के प्रयोजन से लेखाओं के मिथ्याकरण के एक या अधिक अपराधों का अभियोग है, तब उस पर ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए एक ही विचारण में आरोप लगाया जा सकता है और विचारण किया जा सकता है ।
(3) यदि अभिकथित कार्यों से तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की, जिससे अपराध परिभाषित या दंडनीय हों, दो या अधिक पृथक परिभाषाओं में आने वाले अपराध बनते हैं तो जिस व्यक्ति पर उन्हें करने का अभियोग है, उस पर ऐसे अपराधों में से प्रत्येक के लिए एक ही विचारण में आरोप लगाया जा सकता है और विचारण किया जा सकता है ।
(4) यदि कई कार्य, जिनमें से एक से या एक से अधिक से स्वयं अपराध गठित करते हैं, मिलकर भिन्न अपराध बनते हैं तो ऐसे कार्यों से मिलकर बने अपराध के लिए और ऐसे कार्यों में से किसी एक या अधिक द्वारा बने किसी अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति पर एक ही विचारण में आरोप लगाया जा सकता है और विचारण किया जा सकता है ।
(5) इस धारा की कोई बात भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 9 पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
उपधारा (1) के दृष्टांत
(क) क एक व्यक्ति ख को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा में है, छुड़ाता है और ऐसा करने में कांस्टेबल ग को, जिसकी अभिरक्षा में ख है, घोर उपहति कारित करता है । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 121 की उपधारा (2) और धारा 263 के अधीन अपराधों के लिए आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(ख) क दिन में गृहभेदन इस आशय से करता है कि बलात्संग करे और ऐसे प्रवेश किए गए गृह में ख की पत्नी से बलात्संग करता है। क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 और धारा 331 की उपधारा (3) के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(ग) क के कब्जे में कई मुद्राएं हैं जिन्हें वह जानता है कि वे कूटकृत हैं और जिनके संबंध में वह यह आशय रखता है कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 337 के अधीन दंडनीय कई कूट रचनाएं करने के प्रयोजन से उन्हें उपयोग में लाए। क पर प्रत्येक मुद्रा पर कब्जे के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 341 की उपधारा (2) के अधीन पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(घ) ख को क्षति कारित करने के आशय से क उसके विरुद्ध दांडिक कार्यवाही यह जानते हुए संस्थित करता है कि ऐसी कार्यवाही के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है और ख पर अपराध करने का मिथ्या अभियोग, यह जानते हुए लगाता है कि ऐसे आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 248 के अधीन दंडनीय दो अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(ङ) ख को क्षति कारित करने के आशय से क उस पर एक अपराध करने का अभियोग यह जानते हुए लगाता है कि ऐसे आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है । विचारण में ख के विरुद्ध क इस आशय से मिथ्या साक्ष्य देता है कि उसके द्वारा ख को मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध करवाए । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 230 और धारा 248 के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(च) क छह अन्य व्यक्तियों के सहित बलवा करने, घोर उपहति करने और ऐसे लोक सेवक पर, जो ऐसे बल्वे को दबाने का प्रयास ऐसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में कर रहा है, हमला करने के अपराध करता है । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 47 की उपधारा (2), धारा 191 की उपधारा (2) और धारा 195 के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(छ) ख, ग और घ के शरीर को क्षति की धमकी क इस आशय से एक ही समय देता है कि उन्हें संत्रास कारित किया जाए । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन तीनों अपराधों में से प्रत्येक के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
दृष्टांत (क) से लेकर (छ) तक में क्रमशः निर्दिष्ट पृथक् आरोपों का विचारण एक ही समय किया जा सकेगा ।
उपधारा (3) के दृष्टांत
(ज) क बेंत से ख पर सदोष आघात करता है। क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115 की उपधारा (2) और धारा 131 के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(झ) चुराए हुए धान्य के कई बोरे क और ख को, जो यह जानते हैं कि वे चुराई हुई संपत्ति हैं, इस प्रयोजन से दे दिए जाते हैं कि वे उन्हें छिपा दें । तब क और ख उन बोरों को अनाज की खेती के तले में छिपाने में स्वेच्छया एक दूसरे की मदद करते हैं । क और ख पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 317 की उपधारा (2) और उपधारा (5) के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वे दोषसिद्ध किए जा सकेंगे ।
(ज) क अपने बालक को यह जानते हुए अरक्षित डाल देती है कि यह संभाव्य है कि उससे वह उसकी मृत्यु कारित कर दे । बालक ऐसे अरक्षित डाले जाने के परिणामस्वरूप मर जाता है । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 93 और धारा 105 के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध की जा सकेगी ।
(ट) क कूटरचित दस्तावेज को बेईमानी से असली साक्ष्य के रूप में इसलिए उपयोग में लाता है कि एक लोक सेवक ख को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 201 के अधीन अपराध के लिए दोषसिद्ध करे । क पर उस संहिता की (धारा 337 के साथ पठित) धारा 233 और धारा 340 की उपधारा (2) के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
उपधारा (4) का दृष्टांत
(ठ) ख को क लूटता है और ऐसा करने में उसे स्वेच्छया उपहति कारित करता है । क पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 45 की उपधारा (2) और धारा 309 की उपधारा (2) और उपधारा (4) के अधीन अपराधों के लिए पृथक्तः आरोप लगाया जा सकेगा और वह दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
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