भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 18/245 / 531
245जब वह अपराध, जो साबित हुआ है, आरोपित अपराध के अंतर्गत है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 267–268स्रोत
(1) जब किसी व्यक्ति पर ऐसे अपराध का आरोप है जिसमें कई विशिष्टियां हैं, जिनमें से केवल कुछ के संयोग से एक पूरा छोटा अपराध बनता है और ऐसा संयोग साबित हो जाता है किन्तु शेष विशिष्टियां साबित नहीं होती हैं तब वह उस छोटे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा सकता है यद्यपि उस पर उसका आरोप नहीं था ।
(2) जब किसी व्यक्ति पर किसी अपराध का आरोप लगाया गया है और ऐसे तथ्य साबित कर दिए जाते हैं जो उसे घटाकर छोटा अपराध कर देते हैं तब वह छोटे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा सकता है यद्यपि उस पर उसका आरोप नहीं था ।
(3) जब किसी व्यक्ति पर किसी अपराध का आरोप है तब वह उस अपराध को करने के प्रयत्न के लिए दोषसिद्ध किया जा सकता है यद्यपि प्रयत्न के लिए पृथक् आरोप न लगाया गया हो ।
(4) इस धारा की कोई बात किसी छोटे अपराध के लिए उस दशा में दोषसिद्धि प्राधिकृत करने वाली न समझी जाएगी जिसमें ऐसे छोटे अपराध के बारे में कार्यवाही शुरू करने के लिए अपेक्षित शर्तें पूरी नहीं हुई हैं ।
दृष्टांत
(क) क पर उस संपत्ति के बारे में, जो वाहक के नाते उसके पास न्यस्त है, आपराधिक न्यास-भंग के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316 की उपधारा (3) के अधीन आरोप लगाया गया है । यह प्रतीत होता है कि उस संपत्ति के बारे में धारा 346 की उपधारा (2) के अधीन उसने आपराधिक न्यास-भंग तो किया है किन्तु वह उसे वाहक के रूप में न्यस्त नहीं की गई थी । वह धारा 316 की उपधारा (2) के अधीन आपराधिक न्यास-भंग के लिए दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
(ख) क पर घोर उपहति कारित करने के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 47 की उपधारा (2) के अधीन आरोप है । वह साबित कर देता है कि उसने घोर और आकस्मिक प्रकोपन पर कार्य किया था । वह उस संहिता की धारा 122 की उपधारा (2) के अधीन दोषसिद्ध किया जा सकेगा ।
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