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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 29/392 / 531

392निर्णय

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 324–325स्रोत

(1) आरंभिक अधिकारिता के दंड न्यायालय में होने वाले प्रत्येक विचारण में निर्णय पीठासीन अधिकारी द्वारा खुले न्यायालय में या तो विचारण की समाप्ति के पश्चात् तुरन्त या बाद में ऐसे किसी पश्चात्वर्ती समय पर जो पैंतालीस दिन के बाद का न हो, जिसकी सूचना पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं को दी जाएगी,—

(क) संपूर्ण निर्णय देकर सुनाया जाएगा; या

(ख) संपूर्ण निर्णय पढ़कर सुनाया जाएगा; या

(ग) अभियुक्त या उसके अभिवक्ता द्वारा समझी जाने वाली भाषा में निर्णय का प्रवर्तनशील भाग पढ़कर और निर्णय का सार समझाकर सुनाया जाएगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन निर्णय दिया जाता है, वहां पीठासीन अधिकारी उसे आशुलिपि में लिखवाएगा और जैसे ही अनुलिपि तैयार हो जाती है वैसे ही खुले न्यायालय में उस पर और उसके प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करेगा, और उस पर निर्णय दिए जाने की तारीख डालेगा ।

(3) जहां निर्णय या उसका प्रवर्तनशील भाग, यथास्थिति, उपधारा (4) के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन पढ़कर सुनाया जाता है, वहां पीठासीन अधिकारी द्वारा खुले न्यायालय में उस पर तारीख डाली जाएगी और हस्ताक्षर किए जाएंगे और यदि वह उसके द्वारा स्वयं अपने हाथ से नहीं लिखा गया है तो निर्णय के प्रत्येक पृष्ठ पर उसके द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे ।

(4) जहां निर्णय उपधारा (1) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट रीति से सुनाया जाता है, वहां संपूर्ण निर्णय या उसकी एक प्रतिलिपि पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं के अवलोकन के लिए तुरंत निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी :

परंतु यह कि न्यायालय, जहां तक संभव हो, निर्णय की तारीख से सात दिन की अवधि के भीतर अपने पोर्टल पर निर्णय की प्रति अपलोड करेगा ।

(5) यदि अभियुक्त अभिरक्षा में है तो निर्णय सुनने के लिए या तो उसे व्यक्तिगत रूप से या श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से, लाया जाएगा ।

(6) यदि अभियुक्त अभिरक्षा में नहीं है तो उससे न्यायालय द्वारा सुनाए जाने वाले निर्णय को सुनने के लिए उपस्थित होने की अपेक्षा की जाएगी, किन्तु उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें विचारण के दौरान उसकी वैयक्तिक उपस्थिति से उसे अभिमुक्ति दे दी गई है और दंडादेश केवल जुर्माने का है या उसे दोषमुक्त किया गया है :

परन्तु जहां एक से अधिक अभियुक्त व्यक्ति हैं और उनमें से एक या एक से अधिक उस तारीख को न्यायालय में उपस्थित नहीं हैं जिसको निर्णय सुनाया जाने वाला है तो पीठासीन अधिकारी उस मामले को निपटाने में अनुचित विलंब से बचने के लिए उनकी अनुपस्थिति में भी निर्णय सुना सकेगा ।

(7) किसी भी दंड न्यायालय द्वारा सुनाया गया कोई निर्णय केवल इस कारण विधितः अमान्य न समझा जाएगा कि उसके सुनाए जाने के लिए सूचित दिन को या स्थान में कोई पक्षकार या उसका अधिवक्ता अनुपस्थित था या पक्षकारों पर या उनके अधिवक्ताओं पर या उनमें से किसी पर ऐसे दिन और स्थान की सूचना की तामील करने में कोई लोप या त्रुटि हुई थी ।

(8) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह धारा 511 के उपबंधों के विस्तार को किसी प्रकार से परिसीमित करती है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।