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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 29/404 / 531

404अभियुक्त और अन्य व्यक्तियों को निर्णय की प्रति का दिया जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 331–332स्रोत

(1) जब अभियुक्त को कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब निर्णय के सुनाए जाने के पश्चात् निर्णय की एक प्रति उसे निःशुल्क तुरन्त दी जाएगी ।

(2) अभियुक्त के आवेदन पर, निर्णय की एक प्रमाणित प्रति या जब वह चाहे तब, यदि व्यवहार्य हो तो उसकी भाषा में या न्यायालय की भाषा में उसका अनुवाद, अविलंब उसे दिया जाएगा और जहां निर्णय की अभियुक्त द्वारा अपील हो सकती है वहां प्रत्येक दशा में ऐसी प्रति निःशुल्क दी जाएगी :

परन्तु जहां मृत्यु का दंडादेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित या पुष्ट किया जाता है वहां निर्णय की प्रमाणित प्रति अभियुक्त को तुरन्त निःशुल्क दी जाएगी चाहे वह उसके लिए आवेदन करे या न करे ।

(3) उपधारा (2) के उपबंध धारा 136 के अधीन आदेश के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस निर्णय के संबंध में लागू होते हैं जिसकी अभियुक्त अपील कर सकता है ।

(4) जब अभियुक्त को किसी न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया जाता है और ऐसे निर्णय से साधिकार अपील होती है तो न्यायालय उसे उस अवधि की जानकारी देगा जिसके भीतर यदि वह चाहे तो अपील कर सकेगा ।

(5) उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी दांडिक न्यायालय द्वारा पारित निर्णय या आदेश द्वारा प्रभावित व्यक्ति को, इस निमित्त आवेदन करने पर और विहित प्रभार देने पर ऐसे निर्णय या आदेश की या किसी अभिसाक्ष्य की या अभिलेख के अन्य भाग की प्रति दी जाएगी :

परन्तु यदि न्यायालय किन्हीं विशेष कारणों से ठीक समझता है तो उसे वह निःशुल्क भी दे सकेगा :

परन्तु यह और कि न्यायालय, सरकार को, अभियोजन अधिकारी द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर ऐसे निर्णय, आदेश, अभिसाक्ष्य या अभिलेख की सत्यापित प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराएगा ।

(6) उच्च न्यायालय नियमों द्वारा उपबंध कर सकेगा कि किसी दांडिक न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश की प्रतियां ऐसे व्यक्ति को, जो निर्णय या आदेश द्वारा प्रभावित न हो उस व्यक्ति द्वारा ऐसी फीस दिए जाने पर और ऐसी शर्तों के अधीन दे दी जाएं जो उच्च न्यायालय ऐसे नियमों द्वारा उपबंधित करे ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।