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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 29/394 / 531

394पूर्वतन दोषसिद्ध अपराधी को अपने पते की सूचना देने का आदेश

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 326–327स्रोत

(1) जब कोई व्यक्ति, जिसे भारत में किसी न्यायालय ने तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया है, किसी अपराध के लिए, जो तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है, द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा पुनः दोषसिद्ध किया जाता है तब, यदि ऐसा न्यायालय ठीक समझे तो वह उस व्यक्ति को कारावास का दंडादेश देते समय यह आदेश भी कर सकेगा कि छोड़े जाने के पश्चात् उसके निवास-स्थान की और ऐसे निवास-स्थान के किसी परिवर्तन की या उससे उसकी अनुपस्थिति की इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से सूचना ऐसे दंडादेश की समाप्ति की तारीख से पांच वर्ष से अनधिक अवधि तक दी जाएगी ।

(2) उपधारा (1) के उपबंध, उन अपराधों को करने के आपराधिक षड्यंत्रों और उन अपराधों के दुष्प्रेरण तथा उन्हें करने के प्रयत्नों को भी लागू होते हैं ।

(3) यदि ऐसी दोषसिद्धि अपील में या अन्यथा अपास्त कर दी जाती है तो ऐसा आदेश शून्य हो जाएगा ।

(4) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा, या उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय द्वारा भी जब वह अपनी पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग कर रहा है, किया जा सकेगा ।

(5) राज्य सरकार, छोड़े गए सिद्धदोषों के निवास-स्थान की या निवास-स्थान के परिवर्तन की या उससे उनकी अनुपस्थिति की सूचना से संबंधित इस धारा के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।

(6) ऐसे नियम उनके भंग किए जाने के लिए दंड का उपबंध कर सकेंगे और जिस व्यक्ति पर ऐसे किसी नियम को भंग करने का आरोप है उसका विचारण उस जिले में सक्षम अधिकारिता वाले मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकेगा जिसमें उस व्यक्ति द्वारा अपने निवास-स्थान के रूप में अन्तिम सूचित स्थान है ।

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