भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 29/393 / 531
393निर्णय की भाषा और अन्तर्वस्तु
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 325–326स्रोत
(1) इस संहिता द्वारा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, धारा 392 में निर्दिष्ट प्रत्येक निर्णय—
(क) न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा ;
(ख) अवधारण के लिए प्रश्न, उस प्रश्न या उन प्रश्नों पर विनिश्चय और विनिश्चय के कारण अन्तर्विष्ट करेगा ;
(ग) वह अपराध (यदि कोई हो) जिसके लिए और भारतीय न्याय संहिता, 2023 या अन्य विधि की वह धारा, जिसके अधीन अभियुक्त दोषसिद्ध किया गया है, और वह दंड जिसके लिए वह दंडादिष्ट है, विनिर्दिष्ट करेगा ;
(घ) यदि निर्णय दोषमुक्ति का है तो, उस अपराध का कथन करेगा जिससे अभियुक्त दोषमुक्त किया गया है और निदेश देगा कि वह स्वतंत्र कर दिया जाए ।
(2) जब दोषसिद्धि भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन है और यह संदेह है कि अपराध उस संहिता की दो धाराओं में से किसके अधीन या एक ही धारा के दो भागों में से किसके अधीन आता है तो न्यायालय इस बात को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करेगा और वैकल्पिक निर्णय देगा ।
(3) जब दोषसिद्धि, मृत्यु से या वैकल्पिक आजीवन कारावास से या कई वर्षों की अवधि के कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए है, तब निर्णय में, दिए गए दंडादेश के कारणों का और मृत्यु के दंडादेश की दशा में ऐसे दंडादेश के लिए विशेष कारणों का, कथन होगा ।
(4) जब दोषसिद्धि एक वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए है किन्तु न्यायालय तीन मास से कम अवधि के कारावास का दंड अधिरोपित करता है, तब वह ऐसा दंड देने के अपने कारणों को लेखबद्ध करेगा उस दशा के सिवाय जब वह दंडादेश न्यायालय के उठने तक के लिए कारावास का नहीं है या वह मामला इस संहिता के उपबंधों के अधीन संक्षेपतः विचारित नहीं किया गया है ।
(5) जब किसी व्यक्ति को मृत्यु का दंडादेश दिया गया है तो वह दंडादेश यह निदेश देगा कि उसे गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु नहीं हो जाए ।
(6) धारा 136 के अधीन या धारा 157 की उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक आदेश में और धारा 144, धारा 464 या धारा 166 के अधीन किए गए प्रत्येक अंतिम आदेश में, अवधारण के लिए प्रश्न, उस प्रश्न या उन प्रश्नों पर विनिश्चय और विनिश्चय के कारण अन्तर्विष्ट होंगे ।
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