नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 5/113 / 570

108कभारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 19स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

वह व्यक्ति इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो [भारत] से बाहर और उससे परे किसी ऐसे कार्य के किए जाने का [भारत] में दुष्प्रेरण करता है जो अपराध होगा, यदि [भारत] में किया जाए ।

दृष्टांत

क [भारत] में ख को, जो गोवा में विदेशीय है, गोवा में हत्या करने के लिए उकसाता है । क हत्या के दुष्प्रेरण का दोषी है ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1898 के अधिनियम सं० 4 की धारा 3 द्वारा जोड़ा गया ।
  2. “ब्रिटिश भारत” शब्द अनुक्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948, विधि अनुकूलन आदेश, 1950 और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित किए गए हैं ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।