भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 5/111 / 570
107किसी बात का दुष्प्रेरण
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
वह व्यक्ति किसी बात के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, जो—
पहला—उस बात को करने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाता है ; अथवा
दूसरा—उस बात को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ सम्मिलित होता है, यदि उस षड्यंत्र के अनुसरण में, और उस बात को करने के उद्देश्य से, कोई कार्य या अवैध लोप घटित हो जाए ; अथवा
तीसरा—उस बात के लिए किए जाने में किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा साशय सहायता करता है ।
स्पष्टीकरण 1 —जो कोई व्यक्ति जानबूझकर दुर्व्यपदेशन द्वारा, या तात्त्विक तथ्य, जिसे प्रकट करने के लिए वह आबद्ध है, जानबूझकर छिपाने द्वारा, स्वेच्छया किसी बात का किया जाना कारित या उपाप्त करता है अथवा कारित या उपाप्त करने का प्रयत्न करता है, वह उस बात का किया जाना उकसाता है, यह कहा जाता है ।
दृष्टांत
क, एक लोक आफिसर, न्यायालय के वारन्ट द्वारा य को पकड़ने के लिए प्राधिकृत है । ख उस तथ्य को जानते हुए और यह भी जानते हुए कि ग, य, नहीं है, क को जानबूझकर यह व्यपदिष्ट करता है कि ग, य है, और एतद्द्वारा साशय क से य को पकड़वाता है । यहां ख, ग के पकड़े जाने का उकसाने द्वारा दुष्प्रेरण करता है ।
स्पष्टीकरण 2—जो कोई या तो किसी कार्य के किए जाने से पूर्व या किए जाने के समय, उस कार्य के किए जाने को सुकर बनाने के लिए कोई बात करता है और तद्द्वारा उसके किए जाने को सुकर बनाता है, वह उस कार्य के करने में सहायता करता है, यह कहा जाता है।
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