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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/45 / 358

45किसी बात का दुष्प्रेरण

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 31–32स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

वह व्यक्ति, किसी बात को किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, जो—

(क) उस बात को करने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाता है ; या

(ख) उस बात को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ सम्मिलित होता है, यदि उस षड्यंत्र के अनुसरण में, और उस बात को करने के उद्देश्य से, कोई कार्य या अवैध लोप घटित हो जाए ; या

(ग) उस बात को किए जाने में किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा जानबूझकर सहायता करता है ।

स्पष्टीकरण —कोई व्यक्ति, जो जानबूझकर मिथ्या निरूपण द्वारा, या किसी तात्विक तथ्य, जिसे प्रकट करने के लिए वह आबद्ध है, जानबूझकर छिपाने द्वारा, स्वेच्छया किसी बात का किया जाना कारित या उपाप्त करता है, या कारित या उपाप्त करने का प्रयत्न करता है, यह कहा जाता है कि वह उस कृत्य का किया जाना उकसाता है ।

दृष्टांत

क, एक लोक अधिकारी, न्यायालय के वारन्ट द्वारा य को पकड़ने के लिए प्राधिकृत है । ख उस तथ्य को जानते हुए और यह भी जानते हुए कि ग, य, नहीं है, क को जानबूझकर यह निरूपित करता है कि ग, य है, और उसके द्वारा जानबूझकर क से ग को पकड़वाता है । यहां ख, ग के पकड़े जाने का उकसाने द्वारा दुष्प्रेरण करता है ।

स्पष्टीकरण 2—जो कोई या तो किसी कार्य को किए जाने से पूर्व या किए जाने के समय, उस कार्य के किए जाने को सुकर बनाने के लिए कोई बात करता है और उसके द्वारा उसके किए जाने को सुकर बनाता है, वह उस कार्य को करने में सहायता करता है, यह कहा जाता है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।