भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/51 / 358
51दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 34–35स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजब किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता है, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो :
परन्तु यह तब जबकि किया गया कार्य दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम था और उस उकसाहट के असर के अधीन या उस सहायता से या उस षड्यंत्र के अनुसरण में किया गया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है ।
दृष्टांत
(क) एक शिशु को य के भोजन में विष डालने के लिए क उकसाता है, और उस प्रयोजन से उसे विष परिदत्त करता है । वह शिशु उस उकसाहट के परिणामस्वरूप भूल से म के भोजन में, जो य के भोजन के पास रखा हुआ है, विष डाल देता है । यहां, यदि वह शिशु क के उकसाने के असर के अधीन उस कार्य को कर रहा था, और किया गया कार्य उन परिस्थितियों में उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम है, तो क उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस शिशु को म के भोजन में विष डालने के लिए उकसाया हो ।
(ख) ख को य का घर जलाने के लिए क उकसाता है । ख उस घर को आग लगा देता है और उसी समय वहां सम्पत्ति की चोरी करता है । क यद्यपि घर को जलाने के दुष्प्रेरण का दोषी है, किन्तु चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी नहीं है ; क्योंकि वह चोरी एक अलग कार्य थी और उस घर के जलाने का अधिसम्भाव्य परिणाम नहीं थी ।
(ग) ख और ग को बसे हुए घर में अर्धरात्रि में लूट के प्रयोजन से भेदन करने के लिए क उकसाता है, और उनको उस प्रयोजन के लिए आयुध देता है । ख और ग वह गृहभेदन करते हैं, और य द्वारा जो निवासियों में से एक है, प्रतिरोध किए जाने पर, य की हत्या कर देते हैं । यहां, यदि वह हत्या उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम थी, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है ।
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