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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/59 / 358

59किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 37–38स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, लोक सेवक होते हुए किसी अपराध का किया जाना, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है, सुकर बनाने के आशय से या यह जानते हुए संभाव्यतः उसके द्वारा सुकर बनाएगा, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या लोप द्वारा या विगूढ़न या किसी अन्य सूचना प्रच्छन्न साधन के उपयोग द्वारा स्वेच्छया छिपाता है या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है, (को यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या दोनों से; या

(ख) यदि वह अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी ; या

(ग) यदि वह अपराध नहीं किया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबंधित है, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत क, एक पुलिस अधिकारी, लूट किए जाने से संबंधित सभी परिकल्पनाओं की, जो

उसको ज्ञात हो जाए, सूचना देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए और यह जानते हुए कि ख लूट करने की परिकल्पना बना रहा है, उस अपराध के किए जाने को इस प्रकार सुकर बनाने के आशय से ऐसी सूचना देने का लोप करता है । यहां क ने ख की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी अवैध लोप द्वारा छिपाया है, और वह इस धारा के उपबंध के अनुसार दंड के लिए दायी है ।

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