नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/58 / 358

58मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 37स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय किसी अपराध का किया जाना सुकर बनाने के आशय से या यह जानते हुए संभाव्यतः उसके द्वारा सुकर बनाएगा, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या लोप द्वारा या विगूढ़न या किसी अन्य सूचना प्रच्छन्न साधन के उपयोग द्वारा स्वेच्छया छिपाता है या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है,—

(क) यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी ; या

(ख) यदि अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा । दृष्टांत क, यह जानते हुए कि ख स्थान पर डकैती पड़ने वाली है, मजिस्ट्रेट को यह मिथ्या

सूचना देता है कि डकैती ग स्थान पर पड़ने वाली है, जो विपरीत दिशा में है और इस आशय से कि उसके द्वारा उस अपराध का किया जाना सुकर बनाए, मजिस्ट्रेट को भुलावा देता है । डकैती परिकल्पना के अनुसरण में ख स्थान पर पड़ती है । क इस धारा के अधीन दंडनीय है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।