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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/55 / 358

55मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 35–36स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ; और यदि ऐसा कोई कार्य कर दिया जाए, जिसके लिए दुष्प्रेरक उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दायित्व के अधीन हो और जिससे किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो, तो दुष्प्रेरक दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

दृष्टांत

ख को य की हत्या करने के लिए क उकसाता है । वह अपराध नहीं किया जाता है । यदि य की हत्या ख कर देता है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास के दण्ड से दण्डनीय होता । इसलिए, क कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय है और जुर्माने से भी दण्डनीय है ; और यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप य को कोई उपहति हो जाती है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।