भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 4/61 / 358
61आपराधिक षड्यंत्र
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 38स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जब दो या अधिक व्यक्ति—
(क) कोई अवैध कार्य ; या
(ख) कोई ऐसा कार्य, जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा, करने या करवाने के लिए सामान्य उद्देश्य से सहमत होते हैं, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड्यंत्र कहलाती है:
परंतु किसी अपराध को करने की सहमति के सिवाय कोई सहमति आपराधिक षड्यंत्र तब तक न होगी, जब तक कि सहमति के अतिरिक्त कोई कार्य उसके अनुसरण में उस सहमति के एक या अधिक पक्षकारों द्वारा नहीं कर दिया जाता ।
स्पष्टीकरण—यह तत्वहीन है कि अवैध कार्य ऐसी सहमति का चरम उद्देश्य है या उस उद्देश्य का आनुषंगिक मात्र है ।
(2) जो कोई,—
(क) मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होगा, यदि ऐसे षड्यंत्र के दंड के लिए इस संहिता में कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है, तो वह उसी प्रकार दंडित किया जाएगा, मानो उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था ;
(ख) पूर्वोक्त रूप से दंडनीय किसी अपराध को करने के आपराधिक षड्यंत्र से भिन्न किसी आपराधिक षड्यंत्र में शामित्र होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से अधिक की नहीं होगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
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