भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 7/107 / 531
107संपत्ति की कुर्की, जब्ती या वापसी
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 196–197स्रोत
(1) जहां किसी पुलिस अधिकारी को अन्वेषण करते समय यह विश्वास करने का कारण है कि कोई संपत्ति प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः किसी अपराधी क्रियाकलाप के परिणामस्वरूप या किसी अपराध के कारित करने से व्युत्पन्न होती है या प्राप्त की जाती है तो वह, यथास्थिति, पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त के अनुमोदन से ऐसी संपत्ति की कुर्की के लिए मामले का विचारण करने के लिए अपराध का संज्ञान करने या सुपुर्द करने के लिए अधिकारिता का प्रयोग करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, आवेदन दे सकेगा ।
(2) यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट को साक्ष्य लेने के पूर्व या पश्चात् यह विश्वास करने का कारण है कि सभी या ऐसी संपत्तियों में से कोई अपराध के लिए प्रयुक्त की जाती है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को चौदह दिनों के भीतर कारण दर्शित करने के लिए नोटिस जारी कर सकेगा कि क्यों न कुर्की का आदेश किया जाए ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन किसी व्यक्ति को जारी किया गया नोटिस किसी ऐसी संपत्ति को विनिर्दिष्ट करता है जो कि किसी ऐसे व्यक्ति के निमित्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारित की जा रही है तो ऐसे नोटिस की एक प्रति ऐसे अन्य व्यक्ति को भी तामील की जा सकेगी ।
(4) न्यायालय या मजिस्ट्रेट, स्पष्टीकरण, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात् उपधारा (2) के अधीन कारण बताओ नोटिस जारी कर सकेगा और ऐसे न्यायालय या मजिस्ट्रेट अपने समक्ष उपलब्ध तात्विक तथ्य को तथा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् ऐसी संपत्तियों के संबंध में, जो अपराध का आगम होना पाई जाती हैं, कुर्की का आदेश पारित कर सकेगा :
परंतु यदि ऐसा व्यक्ति कारण बताओ नोटिस में विनिर्दिष्ट चौदह दिनों की अवधि के भीतर न्यायालय या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित नहीं होता है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट एकपक्षीय आदेश पारित कर सकेगा ।
(5) उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट की यह राय है कि उक्त उपधारा के अधीन नोटिस के जारी होने से कुर्की या अधिग्रहण का उद्देश्य विफल हो जाएगा तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसी संपत्ति की सीधे कुर्की या अधिग्रहण का एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित कर सकेगा और ऐसा आदेश उपधारा (6) के अधीन आदेश पारित करने तक प्रवृत्त रहेगा ।
(6) यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट यह पाता है कि कुर्क या अभिगृहीत संपत्ति अपराध का आगम है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट आदेश द्वारा जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे व्यक्तियों को, जो ऐसे अपराध से प्रभावित हुए हों अपराध के ऐसे आगमों को आनुपातिक रूप में वितरित करने का निदेश दे सकेगा ।
(7) उपधारा (6) के अधीन पारित किसी आदेश की प्राप्ति पर जिला मजिस्ट्रेट साठ दिन की अवधि के भीतर अपराध के आगमों को या तो स्वयं वितरण करेगा या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को ऐसे वितरण को करने के लिए प्राधिकृत करेगा ।
(8) यदि ऐसे आगमों को प्राप्त करने के लिए कोई दावेदार नहीं है या कोई दावेदार अभिनिश्चय नहीं है या दावेदारों के समाधान के पश्चात् कोई अधिशेष है तो अपराध के ऐसे आगमों को सरकार जब्त कर लेगी ।
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