भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 9/125 / 531
125दोषसिद्धि पर परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 204स्रोत
(1) जब सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय किसी व्यक्ति को उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध के लिए या किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण के लिए सिद्धदोष ठहराता है और उसकी यह राय है कि यह आवश्यक है कि परिशांति कायम रखने के लिए ऐसे व्यक्ति से प्रतिभूति ली जाए, तब न्यायालय ऐसे व्यक्ति को दंडादेश देते समय उसे आदेश दे सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनधिक इतनी अवधि के लिए, जितनी वह ठीक समझे, परिशांति कायम रखने के लिए, बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित करे ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध निम्नलिखित हैं :—
(क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 1 के अधीन दंडनीय कोई अपराध, जो धारा 193 की उपधारा (1) या धारा 196 या धारा 197 के अधीन दंडनीय अपराध से भिन्न है ;
(ख) कोई ऐसा अपराध जो, या जिसके अंतर्गत, हमला या आपराधिक बल का प्रयोग या रिष्टि करना है ;
(ग) आपराधिक अभित्रास का कोई अपराध ;
(घ) कोई अन्य अपराध, जिससे परिशांति भंग हुई है या जिससे परिशांति भंग आशयित है, या जिसके बारे में ज्ञात था कि उससे परिशांति भंग संभाव्य है ।
(3) यदि दोषसिद्धि अपील पर या अन्यथा अपास्त कर दी जाती है तो बंधपत्र या जमानतपत्र जो ऐसे निष्पादित किया गया था, शून्य हो जाएगा ।
(4) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा या किसी न्यायालय द्वारा भी जब वह पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, किया जा सकेगा ।
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