भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 9/129 / 531
129आभ्यासिक अपराधियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 206स्रोत
जब किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को यह सूचना मिलती है कि उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर कोई ऐसा व्यक्ति है, जो—
(क) अभ्यासतः लुटेरा, गृहभेदक, चोर या कूटरचयिता है ; या
(ख) चुराई हुई संपत्ति का, उसे चुराई हुई जानते हुए, अभ्यासतः प्राप्तकर्ता है ; या
(ग) अभ्यासतः चोरों की संरक्षा करता है या चोरों को संश्रय देता है या चुराई हुई संपत्ति को छिपाने या उसके व्ययन में सहायता देता है ; या
(घ) व्यपहरण, अपहरण, उद्दापन, छल या रिष्टि का अपराध या भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 10 के अधीन या उस संहिता की धारा 178, धारा 179, धारा 180 या धारा 181 के अधीन दंडनीय कोई अपराध अभ्यासतः करता है या करने का प्रयत्न करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है ; या
(ङ) ऐसे अपराध अभ्यासतः करता है या करने का प्रयत्न करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है, जिनमें परिशांति भंग समाहित है ; या
(च) कोई ऐसा अपराध अभ्यासतः करता है या करने का प्रयत्न करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है जो—
(i) निम्नलिखित अधिनियमों में से एक या अधिक के अधीन कोई अपराध है, अर्थात् :—
(क) ओषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940;
(ख) विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 ;
(ग) कर्मचारी भविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 ;
(घ) आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 ;
(ङ) सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 ;
(च) सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 ;
(छ) खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 ; या
(ii) जमाखोरी या मुनाफाखोरी या खाद्य या ओषधि के अपमिश्रण या भ्रष्टाचार के निवारण के लिए उपबंध करने वाली किसी अन्य विधि के अधीन दंडनीय कोई अपराध है ; या
(छ) ऐसा दुःसाहसिक और भयंकर है कि उसका प्रतिभूति के बिना स्वच्छन्द रहना समाज के लिए परिसंकटमय है,
तब ऐसा मजिस्ट्रेट, ऐसे व्यक्ति से, इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से अपेक्षा कर सकता है कि वह कारण दर्शित करे कि तीन वर्ष से अनधिक की इतनी अवधि के लिए, जितनी वह मजिस्ट्रेट ठीक समझता है, उसे अपने सदाचार के लिए जमानतपत्र निष्पादित करने का आदेश क्यों न दिया जाए ।
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