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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 9/141 / 531

141प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 210–211स्रोत

(1) (क) यदि कोई व्यक्ति, जिसे धारा 125 या धारा 136 के अधीन प्रतिभूति देने के लिए आदेश दिया गया है, ऐसी प्रतिभूति उस तारीख को या उस तारीख के पूर्व, जिसको वह अवधि, जिसके लिए ऐसी प्रतिभूति दी जानी है, प्रारंभ होती है, नहीं देता है, तो वह इसमें इसके पश्चात् ठीक आगे वर्णित दशा के सिवाय कारागार में भेज दिया जाएगा या यदि वह पहले से ही कारागार में है तो वह कारागार में तब तक निरुद्ध रखा जाएगा जब तक ऐसी अवधि समाप्त न हो जाए या जब तक ऐसी अवधि के भीतर वह उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को प्रतिभूति न दे दे जिसने उसकी अपेक्षा करने वाला आदेश दिया था ।

(ख) यदि किसी व्यक्ति द्वारा धारा 136 के अधीन मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसरण में परिशांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित कर दिए जाने के पश्चात्, उसके बारे में ऐसे मजिस्ट्रेट या उसके पद-उत्तरवर्ती के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि उसने बंधपत्र या जमानतपत्र का भंग किया है तो ऐसा मजिस्ट्रेट या पदउत्तरवर्ती, ऐसे सबूत के आधारों को लेखबद्ध करने के पश्चात्, आदेश कर सकता है कि उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए और बंधपत्र या जमानतपत्र की अवधि की समाप्ति तक कारागार में निरुद्ध रखा जाए तथा ऐसा आदेश ऐसे किसी अन्य दंड या जब्ती पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा जिसके प्रति उक्त व्यक्ति विधि के अनुसार दायी हो सके ।

(2) जब ऐसे व्यक्ति को एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए प्रतिभूति देने का आदेश मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया है, तब यदि ऐसा व्यक्ति यथापूर्वोक्त प्रतिभूति नहीं देता है तो वह मजिस्ट्रेट यह निदेश देते हुए वारंट जारी करेगा कि सेशन न्यायालय का आदेश होने तक, वह व्यक्ति कारागार में निरुद्ध रखा जाए और वह कार्यवाही सुविधानुसार शीघ्र ऐसे न्यायालय के समक्ष रखी जाएगी ।

(3) ऐसा न्यायालय ऐसी कार्यवाहियों की परीक्षा करने के और उस मजिस्ट्रेट से किसी और सूचना या साक्ष्य की, जिसे वह आवश्यक समझे, अपेक्षा करने के पश्चात् और संबद्ध व्यक्ति को सुने जाने का उचित अवसर देने के पश्चात् मामले में ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे :

परंतु वह अवधि (यदि कोई हो) जिसके लिए कोई व्यक्ति प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित किया जाता है, तीन वर्ष से अधिक की नहीं होगी ।

(4) यदि एक ही कार्यवाही के अनुक्रम में ऐसे दो या अधिक व्यक्तियों से प्रतिभूति की अपेक्षा की गई है, जिनमें से किसी एक के बारे में कार्यवाही सेशन न्यायालय को उपधारा (2) के अधीन निर्देशित की गई है, तो ऐसे निर्देश में ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य व्यक्ति का भी, जिसे प्रतिभूति देने के लिए आदेश दिया गया है, मामला सम्मिलित किया जाएगा और उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध उस दशा में, ऐसे अन्य व्यक्ति के मामले को भी, इस बात के सिवाय लागू होंगे कि वह अवधि (यदि कोई हो), जिसके लिए वह कारावासित किया जा सकेगा, उस अवधि से अधिक नहीं होगी, जिसके लिए प्रतिभूति देने के लिए उसे आदेश दिया गया था ।

(5) सेशन न्यायाधीश उपधारा (2) या उपधारा (4) के अधीन उसके समक्ष रखी गई किसी कार्यवाही को स्वविवेकानुसार अपर सेशन न्यायाधीश को अंतरित कर सकता है और ऐसे अंतरण पर ऐसा अपर सेशन न्यायाधीश ऐसी कार्यवाही के बारे में इस धारा के अधीन सेशन न्यायाधीश की शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा ।

(6) यदि प्रतिभूति जेल के भारसाधक अधिकारी को निविदत्त की जाती है तो वह उस मामले को उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने आदेश किया, तुरन्त निर्देशित करेगा और ऐसे न्यायालय या मजिस्ट्रेट के आदेशों की प्रतीक्षा करेगा ।

(7) परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने में असफलता के कारण कारावास सादा होगा ।

(8) सदाचार के लिए प्रतिभूति देने में असफलता के कारण कारावास, जहां कार्यवाही धारा 127 के अधीन की गई है, वहां सादा होगा और, जहां कार्यवाही धारा 128 या धारा 129 के अधीन की गई है वहां, जैसा प्रत्येक मामले में न्यायालय या मजिस्ट्रेट निदेश दे, कठिन या सादा होगा ।

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