भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 11/165 / 531
165विवाद की विषयवस्तु का कुर्क करने की और रिसीवर नियुक्त करने की शक्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 224–225स्रोत
(1) यदि धारा 164 की उपधारा (1) के अधीन आदेश करने के पश्चात् किसी समय मजिस्ट्रेट मामले को आपातिक समझता है या यदि वह विनिश्चय करता है कि पक्षकारों में से किसी का धारा 164 में यथानिर्दिष्ट कब्जा उस समय नहीं था, या यदि वह अपना समाधान नहीं कर पाता है कि उस समय उनमें से किसका ऐसा कब्जा विवाद की विषयवस्तु पर था तो वह विवाद की विषयवस्तु को तब तक के लिए कुर्क कर सकता है जब तक कोई सक्षम न्यायालय उसके कब्जे का हकदार व्यक्ति होने के बारे में उसके पक्षकारों के अधिकारों का अवधारण नहीं कर देता है :
परंतु यदि ऐसे मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि विवाद की विषयवस्तु के बारे में परिशांति भंग होने की कोई संभाव्यता नहीं रही तो वह किसी समय भी कुर्की वापस ले सकता है ।
(2) जब मजिस्ट्रेट विवाद की विषयवस्तु को कुर्क करता है तब यदि ऐसी विवाद की विषयवस्तु के संबंध में कोई रिसीवर किसी सिविल न्यायालय द्वारा नियुक्त नहीं किया गया है तो, वह उसके लिए ऐसा व्यवस्था कर सकता है जो वह उस संपत्ति की देखभाल के लिए उचित समझता है या यदि वह ठीक समझता है तो, उसके लिए रिसीवर नियुक्त कर सकता है जिसको मजिस्ट्रेट के नियंत्रण के अधीन रहते हुए वे सब शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन रिसीवर की होती हैं :
परंतु यदि विवाद की विषयवस्तु के संबंध में कोई रिसीवर किसी सिविल न्यायालय द्वारा बाद में नियुक्त कर दिया जाता है तो मजिस्ट्रेट—
(क) अपने द्वारा नियुक्त रिसीवर को आदेश देगा कि वह विवाद की विषयवस्तु का कब्जा सिविल न्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर को दे दे और तत्पश्चात् वह अपने द्वारा नियुक्त रिसीवर को उन्मोचित कर देगा ;
(ख) ऐसे अन्य आनुषंगिक या पारिणामिक आदेश कर सकेगा, जो न्यायसंगत हैं ।
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