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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/अध्याय 5/42 / 534

41पुलिस वारंट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 12–14स्रोत

(1) कोई पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारंट के बिना किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है—

[(क) जो पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करता है ;

(ख) जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि उसने कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की हो सकेगी या जिसकी अवधि सात वर्ष की हो सकेगी, चाहे वह जुर्माने सहित हो अथवा जुर्माने के बिना, दंडनीय संज्ञेय अपराध किया है, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी जाती हैं, अर्थात् :—

(i) पुलिस अधिकारी के पास ऐसे परिवाद, इत्तिला या संदेह के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उस व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है ;

(ii) पुलिस अधिकारी का यह समाधान हो गया है कि ऐसी गिरफ्तारी :—

(क) ऐसे व्यक्ति को कोई और अपराध करने से निवारित करने के लिए ; या

(ख) अपराध के समुचित अन्वेषण के लिए ; या

(ग) ऐसे व्यक्ति को ऐसे अपराध के साक्ष्य को गायब करने या ऐसे साक्ष्य के साथ किसी भी रीति में छेड़छाड़ करने से निवारित करने के लिए ; या

(घ) उस व्यक्ति को, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो मामले के तथ्यों से परिचित है, उप्रेरित करने, उसे धमकी देने या उससे वायदा करने से जिससे उसे न्यायालय या पुलिस अधिकारी को ऐसे तथ्यों को प्रकट न करने के लिए मनाया जा सके, निवारित करने के लिए ; या

(ङ) जब तक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, न्यायालय में उसकी उपस्थिति, जब भी अपेक्षित हो, सुनिश्चित नहीं की जा सकती,

आवश्यक है, और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय अपने कारणों को लेखबद्ध करेगा ;

[परंतु कोई पुलिस अधिकारी, ऐसे सभी मामलों में, जहां किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी इस उपधारा के उपबंधों के अधीन अपेक्षित नहीं है, गिरफ्तारी ने करने के कारणों को लेखबद्ध करेगा ।]

(खक) जिसके विरुद्ध विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है कि उसने कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से अधिक की हो सकेगी, चाहे वह जुर्माने सहित हो अथवा जुर्माने के बिना, अथवा मृत्यु दंडादेश से दंडनीय संज्ञेय अपराध किया है और पुलिस अधिकारी के पास उस इत्तिला के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि उस व्यक्ति ने उक्त अपराध किया है ;]

(ग) जो या तो इस संहिता के अधीन या राज्य सरकार के आदेश द्वारा अपराधी उद्घोषित किया जा चुका है ; अथवा

(घ) जिसके कब्जे में कोई ऐसी चीज पाई जाती है जिसके चुराई हुई संपत्ति होने का उचित रूप से संदेह किया जा सकता है और जिस पर ऐसी चीज के बारे में अपराध करने का उचित रूप से संदेह किया जा सकता है ; अथवा

(ङ) जो पुलिस अधिकारी को उस समय बाधा पहुंचाता है जब वह अपना कर्तव्य कर रहा है, या जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है या निकल भागने का प्रयत्न करता है ; अथवा

(च) जिस पर संघ के सशस्त्र बलों में से किसी से अभित्याजक होने का उचित संदेह है ; अथवा

(छ) जो भारत से बाहर किसी स्थान में किसी ऐसे कार्य किए जाने से, जो यदि भारत में किया गया होता तो अपराध के रूप में दंडनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण संबंधी किसी विधि के अधीन या अन्यथा भारत में पकड़े जाने का या अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने का भागी है, संबद्ध रह चुका है या जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि वह ऐसे संबद्ध रह चुका है ; अथवा

(ज) जो छोड़ा गया सिद्धदोष होते हुए धारा 356 की उपधारा (5) के अधीन बनाए गए किसी नियम को भंग करता है ; अथवा

(झ) जिसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी से लिखित या मौखिक अध्यपेक्षा प्राप्त हो चुकी है

परंतु यह तब जब कि अध्यपेक्षा में उस व्यक्ति का, जिसे गिरफ्तार किया जाना है, और उस अपराध का या अन्य कारण का, जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है, विनिर्देश है और उससे यह दर्शित होता है कि अध्यपेक्षा जारी करने वाले अधिकारी द्वारा वारंट के बिना वह व्यक्ति विधिपूर्वक गिरफ्तार किया जा सकता था ।

[(2) धारा 42 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो किसी असंज्ञेय अपराध से संबद्ध है या जिसके विरुद्ध कोई परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित संदेह विद्यमान है कि वह ऐसे संबद्ध रह चुका है, मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के सिवाय, गिरफ्तार नहीं किया जाएगा ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2009 के अधिनियम सं० 5 की धारा 5 द्वारा खंड (क) और (ख) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. 2010 के अधिनियम सं० 41 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
  3. 2009 के अधिनियम सं० 5 की धारा 5 द्वारा उपधारा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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