भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 6/129 / 570
121कधारा 121 द्वारा दंडनीय अपराधों को करने का षड्यंत्र
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई धारा 121 द्वारा दंडनीय अपराधों में से कोई अपराध करने के लिए [भारत] के भीतर *** या बाहर षड्यंत्र करेगा, या [केंद्रीय सरकार को] या किसी [राज्य] की सरकार को ***] आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा आतंकित करने का षड्यंत्र करेगा, वह [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा [और जुर्माने से भी दंडनीय होगा] ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के अधीन षड्यंत्र गठित होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसके अनुसरण में कोई कार्य या अवैध लोप गठित हुआ हो ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 1870 के अधिनियम सं० 27 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित ।
- “ब्रिटिश भारत” शब्द अनुक्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948, विधि अनुकूलन आदेश, 1950 और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित किए गए हैं ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “या क्वीन की प्रांतों या उनके किसी भाग की प्रभुता से वंचित करना” शब्दों का लोप किया गया ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “भारत सरकार या किसी स्थानीय सरकार” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “प्रांतीय” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा “या बर्मा सरकार” शब्दों का लोप किया गया ।
- 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1921 के अधिनियम सं० 16 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
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