नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 6/133 / 570

124कराजद्रोह

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 24स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा, या दृश्यरूपण द्वारा या अन्यथा **#* [भारत] *** में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमान पैदा करेगा, या पैदा करने का, प्रयत्न करेगा या अप्रीति प्रदीप्त करेगा, या प्रदीप्त करने का प्रयत्न करेगा, वह [आजीवन कारावास] से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या तीन वर्ष तक के कारावास से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या जुर्माने से दंडित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण 1—“अप्रीति” पद के अंतर्गत अभक्ति और शत्रुता की समस्त भावनाएं आती हैं ।

स्पष्टीकरण 2—घृणा, अवमान या अप्रीति को प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न किए बिना, सरकार के कामों के प्रति विधिपूर्ण साधनों द्वारा उनको परिवर्तित कराने की दृष्टि से अननुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टिप्पणियां इस धारा के अधीन अपराध नहीं हैं ।

स्पष्टीकरण 3—घृणा, अवमान या अप्रीति को प्रदीप्त किए बिना या प्रदीप्त करने का प्रयत्न किए बिना, सरकार की प्रशासनिक या अन्य क्रिया के प्रति अननुमोदन प्रकट करने वाली टीका-टिप्पणियां इस धारा के अधीन अपराध गठित नहीं करती ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1898 के अधिनियम सं० 4 की धारा 4 द्वारा मूल धारा 124क के स्थान पर प्रतिस्थापित । मूल धारा 124क को 1870 के अधिनियम सं० 27 की धारा 5 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था ।
  2. “हर मजेस्टी या” शब्दों का विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा लोप किया गया । “या क्राउन प्रतिनिधि” शब्दों का, जिन्हें भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “मजेस्टी” शब्द के पश्चात् अंतःस्थापित किया गया था, भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा लोप किया गया ।
  3. “ब्रिटिश भारत” शब्द अनुक्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948, विधि अनुकूलन आदेश, 1950 और 1951 के अधिनियम सं०3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित किए गए हैं ।
  4. “या ब्रिटिश बर्मा” शब्दों का, जिन्हें भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था, विधि अनुकूलन आदेश, 1948 द्वारा लोप किया गया ।
  5. 1955 के अधिनियम सं०26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन या उससे किसी लघुतर अवधि के लिए निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।