भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 7/141 / 570
132विद्रोह का दुष्प्रेरण यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई [भारत सरकार] की सेना, [नौसेना या वायुसेना] के किसी आफिसर, सैनिक, [नौसैनिक या वायुसैनिक] द्वारा विद्रोह किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाए, तो वह मृत्यु से या [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
संशोधन टिप्पणियां
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “क्वीन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “या नौसेना” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “या नौसैनिक” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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