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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 7/145 / 570

136अभित्याजक को संश्रय देना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 25स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई सिवाय एतस्मिन्पश्चात् यथा अपवादित के, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि [भारत सरकार] की सेना, [नौसेना या वायुसेना] के किसी आफिसर, सैनिक, [नौसैनिक या वायुसैनिक] ने अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, [नौसैनिक या वायुसैनिक] को संश्रय देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा ।

अपवाद—इस उपबंध का विस्तार उस मामले पर नहीं है, जिसमें पत्नी द्वारा अपने पति को संश्रय दिया जाता है।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “और नौसेना” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “क्वीन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  3. 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “या नौसेना” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  4. 1927 के अधिनियम सं० 10 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “या नौसैनिक” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।