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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 14/300 / 570

271करन्तीन के नियम की अवज्ञा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 51स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी जलयान को करन्तीन की स्थिति में रखे जाने के, या करन्तीन की स्थिति वाले जलयानों का किनारे से या अन्य जलयानों से समागम विनियमित करने के, या ऐसे स्थानों के, जहां कोई संक्रामक रोग फैल रहा हो और अन्य स्थानों के बीच समागम विनियमित करने के लिए [*** *** *** सरकार द्वारा] बनाए गए और प्रख्यापित किसी नियम को जानते हुए अवज्ञा करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “भारत सरकार द्वारा या किसी सरकार द्वारा” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “केन्द्रीय या किसी प्रादेशिक” शब्दों का लोप किया गया ।
  3. भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा “या क्राउन प्रतिनिधि” शब्दों का लोप किया गया ।

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