भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 14/324 / 570
294कलाटरी कार्यालय रखना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 54–55स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई ऐसी कोई लाटरी, [जो न तो [राज्य लाटरी] हो और न तत्संबंधित [राज्य] सरकार द्वारा प्राधिकृत लाटरी हो,] निकालने के प्रयोजन के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ;
तथा जो कोई ऐसी लाटरी में किसी टिकट, लाट, संख्यांक या आकृति को निकालने से संबंधित या लागू होने वाली किसी घटना या परिस्थिति पर किसी व्यक्ति के फायदे के लिए किसी राशि को देने की, या किसी माल के परिदान को, या किसी बात को करने की, या किसी बात से प्रविरत रहने की कोई प्रस्थापना प्रकाशित करेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 1870 के अधिनियम सं० 27 की धारा 10 द्वारा अंतःस्थापित ।
- भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा “सरकार द्वारा अप्राधिकृत” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा “केन्दीय सरकार या भाग क राज्य या भाग ख राज्य की सरकार द्वारा चालू की गई लाटरी” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “प्रादेशिक” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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