भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 18/344 / 358
344लेखा का मिथ्याकरण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 143–144स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजो कोई, लिपिक, अधिकारी या सेवक होते हुए, या लिपिक, अधिकारी या सेवक के नाते नियोजित होते हुए या कार्य करते हुए, किसी पुस्तक, इलैक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यवान प्रतिभूति या लेखा को जो उसके नियोजक का हो या उसके नियोजक के कब्जे में हो या जिसे उसने नियोजक के लिए या उसकी ओर से प्राप्त किया हो, साशय और कपट करने के आशय से नष्ट, परिवर्तित, विकृत या मिथ्याकृत करता है या किसी ऐसी पुस्तक, इलैक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख मूल्यवान प्रतिभूति या लेखा में साशय और कपट करने के आशय से कोई मिथ्या प्रविष्टि करता है या करने के लिए दुष्प्रेरण करता है, या उसमें से या उसमें किसी तात्विक विशिष्टि का लोप या परिवर्तन करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के अधीन किसी आरोप में, किसी विशिष्ट व्यक्ति का, जिससे कपट करना आशयित था, नाम बताए बिना या किसी विशिष्ट धनराशि का, जिसके विषय में कपट किया जाना आशयित था या किसी विशिष्ट दिन का, जिस दिन अपराध किया गया था, विनिर्देश किए बिना, कपट करने के साधारण आशय का अभिकथन पर्याप्त होगा ।
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