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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 7/108 / 170

108यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 516स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

जब कोई व्यक्ति किसी अपराध का अभियुक्त है, तब उन परिस्थितियों के अस्तित्व को साबित करने का भार, जो उस मामले को भारतीय न्याय संहिता, 2023 के साधारण अपवादों में से किसी के अन्तर्गत या उक्त संहिता के किसी अन्य भाग में, या उस अपराध की परिभाषा करने वाली किसी विधि में, अन्तर्विष्ट किसी विशेष अपवाद या

परन्तुक के अन्तर्गत कर देती है, उस व्यक्ति पर है और न्यायालय ऐसी परिस्थितियों के अभाव की उपधारणा करेगा ।

दृष्टांत

(क) हत्या का अभियुक्त क, यह अभिकथन करता है कि वह चित्त-विकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति को नहीं जानता था । सबूत का भार क पर है ।

(ख) हत्या का अभियुक्त क, यह अभिकथन करता है कि वह गम्भीर और अचानक प्रकोपन के कारण आत्मनियंत्रण की शक्ति से वंचित हो गया था । सबूत का भार क पर है ।

(ग) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 117 उपबन्ध करती है कि जो कोई, उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 122 की उपधारा (2) में उपबंध है, स्वेच्छया घोर उपहति करेगा, वह अमुक दण्डों से दण्डनीय होगा । धारा 117 के अधीन क पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने का आरोप है । इस मामले को धारा 122 की उपधारा (2) के अधीन लाने वाली परिस्थितियों को साबित करने का भार क पर है ।

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