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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 2/23 / 570

23“सदोष अभिलाभ”

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 5स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

“सदोष अभिलाभ” विधिविरुद्ध साधनों द्वारा ऐसी सम्पत्ति का अभिलाभ है, जिसका वैध रूप से हकदार अभिलाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति न हो ।

“सदोष हानि”—“सदोष हानि” विधिविरुद्ध साधनों द्वारा ऐसी सम्पत्ति की हानि है, जिसका वैध रूप से हकदार हानि उठाने वाला व्यक्ति हो ।

“सदोष अभिलाभ प्राप्त करना” /सदोष हानि उठाना—कोई व्यक्ति सदोष अभिलाभ प्राप्त करता है, यह तब कहा जाता है जब कि वह व्यक्ति सदोष रखे रखता है और तब भी जबकि वह सदोष अर्जन करता है । कोई व्यक्ति सदोष हानि उठाता है, यह तब कहा जाता है जब कि उसे किसी सम्पत्ति से सदोष अलग रखा जाता है और तब भी जबकि उसे किसी सम्पत्ति से सदोष वंचित किया जाता है ।

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