भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 2/41 / 570
40“अपराध”
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
इस धारा के खण्ड 2 और 3 में वर्णित [अध्यायों] और धाराओं में के सिवाय “अपराध” शब्द इस संहिता द्वारा दण्डनीय की गई किसी बात का द्योतक है ।
अध्याय 4, [अध्याय 5क] और निम्नलिखित धारा, अर्थात् धारा [64, 65, 66, [67], 71], 109, 110, 112, 114, 115, 116, 117, [118, 119 और 120], 187, 194, 195, 203, 211, 213, 214, 221, 222, 223,, 224, 225, 327, 328, 329, 330, 331, 347, 348, 388, 389 और 445 में “अपराध” शब्द इस संहिता के अधीन या एत्स्मिनपश्चात् यथापरिभाषित विशेष या स्थानीय विधि के अधीन दण्डनीय बात का द्योतक है ।
और धारा 141, 176, 177, 201, 202, 212, 216 और 441 में “अपराध” शब्द का अर्थ उस दशा में वही है जिसमें कि विशेष या स्थानीय विधि के अधीन दण्डनीय बात ऐसी विधि के अधीन छह मास या उससे अधिक अवधि के कारावास से, चाहे वह जुर्माने सहित हो या रहित, दण्डनीय हो ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 1870 के अधिनियम सं० 27 की धारा 2 द्वारा मूल धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1930 के अधिनियम सं० 8 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा “अध्याय” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1913 के अधिनियम सं० 8 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 1 द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1886 के अधिनियम सं० 10 की धारा 21 (1) द्वारा अंतःस्थापित ।
- 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 51 द्वारा अंतःस्थापित ।
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