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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 18/515 / 570

463कूटरचना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 88स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

[जो कोई, किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग को] इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाए, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति संपत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा करे या इस आशय से रचता है कि कपट करे, या कपट किया जा सके, वह कूटरचना करता है ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 2000 के अधिनियम सं० 21 की धारा 91 और पहली अनुसूची द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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