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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 18/544 / 570

489खकूटरचित या कूटकृत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 93स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी कूटरचित या कूटकृत करेन्सी नोट या बैंक नोट को, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह कूटरचित या कूटकृत है, किसी अन्य व्यक्ति को बेचेगा या उससे खरीदेगा या प्राप्त करेगा या अन्यथा उसका दुर्व्यापार करेगा या असली के रूप में उसे उपयोग में लाएगा, वह [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1950 के अधिनियम सं० 35 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा “489ग और 489घ” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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