भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 27/374 / 531
374चित्तविकृति के आधार पर दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का सुरक्षित अभिरक्षा में निरुद्ध किया जाना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 318–319स्रोत
(1) जब कभी निष्कर्ष में यह कथित है कि अभियुक्त व्यक्ति ने अभिकथित कार्य किया है तब वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय, जिसके समक्ष विचारण किया गया है, उस दशा में जब ऐसा कार्य उस असमर्थता के न होने पर, जो पाई गई, अपराध होता,-
(क) उस व्यक्ति को ऐसे स्थान में और ऐसी रीति से, जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय ठीक समझे, सुरक्षित अभिरक्षा में निरुद्ध करने का आदेश देगा ; या
(ख) उस व्यक्ति को उसके किसी नातेदार या मित्र को सौंपने का आदेश देगा ।
(2) लोक मानसिक स्वास्थ्य स्थापन में अभियुक्त को निरुद्ध करने का उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन कोई आदेश राज्य सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम, 2017 के अधीन बनाए गए, नियमों के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(3) अभियुक्त को उसके किसी नातेदार या मित्र को सौंपने का उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन कोई आदेश उसके ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा निम्नलिखित बातों के संबंध में मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समाधानप्रद रूप में प्रतिभूति देने पर ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं—
(क) सौंपे गए व्यक्ति की समुचित देख-रेख की जाएगी और वह अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित रखा जाएगा ; (खो सौंपा गया व्यक्ति ऐसे अधिकारी के समक्ष और ऐसे समयों और स्थानों पर, जो राज्य सरकार द्वारा निदेशित किए जाएं, निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा ।
(4) मजिस्ट्रेट या न्यायालय, उपधारा (1) के अधीन की गई कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा ।
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