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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 27/378 / 531

378नातेदार या मित्र की देख-रेख के लिए विकृतचित्त व्यक्ति का सौंपा जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 319–320स्रोत

(1) जब कभी धारा 369 या धारा 374 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह व्यक्ति उसकी देख-रेख और अभिरक्षा में रखे जाने के लिए सौंप दिया जाए, तब राज्य सरकार उस नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार के समाधानप्रद रुप में प्रतिभूति इस संबंध में दिए जाने पर कि-

(क) सौंपे गए व्यक्ति की समुचित देख-रेख की जाएगी और वह अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने से निवारित रखा जाएगा ;

(ख) सौंपा गया व्यक्ति ऐसे अधिकारी के समक्ष और ऐसे समयों और स्थानों पर, जो राज्य सरकार द्वारा निदेशित किए जाएं, निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा ;

(ग) सौंपा गया व्यक्ति, उस दशा में जिसमें वह धारा 369 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति है, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा,

ऐसे व्यक्ति को ऐसे नातेदार या मित्र को सौंपने का आदेश दे सकेगी ।

(2) यदि ऐसे सौंपा गया व्यक्ति किसी ऐसे अपराध के लिए अभियुक्त है, जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण स्थगित किया गया है और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षण अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त सौंपा गया है, अपेक्षा करेगा कि वह उसे उस मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे और ऐसे प्रस्तुत किए जाने पर वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 371 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा और निरीक्षण अधिकारी का प्रमाणपत्र साक्ष्य के तौर पर ग्रहण किया जा सकेगा ।

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